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बॉलीवुड सिलेब्स पर जमकर बरसी कंगना, बोलीं- आज बेशर्मी से खड़े होकर कह रहे हैं कि ब्लैक लाइव्स मैटर

नई दिल्ली। बॉलीवुड को क्वीन एक्ट्रेस कंगना रनौत ने हाल ही में रंगभेद-नस्लवाद के मुद्दे पर फिल्म इंडस्ट्री पर तंज कसा है। कंगना ने कहा है कि फेयरनेस क्रीम का विज्ञापन करने वाले भारतीय अश्वेत के खिलाफ हिंसा पर बोल रहे हैं, इससे बड़ा पाखंड कुछ नहीं है। एक्ट्रेस ने कहा कि पालघर में साधु की हत्या पर चुप्पी साधाने वाले बॉलीवुड सिलेब्स अमेरिका के सामाजिक मुद्दे पर बोल रहे हैं। 

Kangana Ranaut

अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस क्रूरता से मौत के मुद्दे पर बॉलीवुड सलेब्रिटीज भी अपनी राय रख रहे हैं। फिल्म उद्योग से जुड़े लोग #BlackLivesMatter और #BlackoutTuesday के जरिए अपना समर्थन जता रहे हैं। इस बीच  कंगना रनौत ने सवाल उठाया है कि बॉलीवुड के प्रभावशाली लोग देश में पालघर जैसे मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं और अमेरिका के समाजिक-आर्थिक मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं। 

Kangana Ranaut

कंगना ने कहा, ''मुझे लगता है कि यह एक फैशन बन गया है कि जो पश्चिम के लिए प्रासंगिक है उसका हिस्सा बन जाइए। लेकिन एशियाई सेलिब्रिटीज और एक्टर्स देश में बहुत प्रभावशाली हैं। मैं नहीं जानती कि वे अमेरिका के सामाजिक राजनीतिक सुधार में क्यों शामिल हो रहे हैं। कुछ सप्ताह पहले जब पुलिसकर्मियों ने दो साधुओं को भीड़ के हवाले कर दिया और सरेआम उनकी हत्या कर दी गई तो किसी ने एक शब्द नहीं बोला। क्योंकि शायद वह बहुसंख्यक भावना से जुड़ा हुआ था।''

Kangana Ranaut

कंगना ने आगे कहा, ''भारतीय सेलिब्रिटी सभी तरह के फेयरनेस प्रॉडक्ट्स का विज्ञापन करते रहे हैं और आज बेशर्मी से खड़े होकर कह रहे हैं कि 'ब्लैक लाइव्स मैटर'। मेरा मतलब है कि उनकी हिम्मत कितनी है? हमारी इंडस्ट्री काले रंग के लोगों को ऐसे रोल नहीं देती जो उनके हिसाब से गोरे रंग वाले के लिए है। क्यों कोई उनसे यह नहीं पूछता कि कैसे फेयरनेस प्रॉडक्ट्स का करोड़ों में विज्ञापन करते हैं और फिर अब अचानक कह रहे हैं कि ब्लैक लाइव्स मैटर, क्योंकि नस्लवाद की जड़ें बहुत गहरी हैं और जब आप ऐसी घटनाओं का व्यावसायिकरण कर देते हैं तो यह यह मानवता का निम्नतम स्तर है।''

KANGNA

एक्ट्रेस ने आगे बताया कि सेलिब्रिटीज अल्पसंख्यकों के मुद्दों को आसानी से समर्थन देते हैं, लेकिन बहुसंख्यकों को अपना समर्थन देने से बचते हैं। भारत में अल्पसंख्यक भावनाओं के साथ खुद को जोड़ना अधिक आसान है।

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