Ray Review: मनोज बाजपेयी और गजराज राव का छाया जादू
वेब सीरीज: रे
निर्देशक: श्रीजीत मुखर्जी, अभिषेक चौबे और वासन बाला
प्रमुख कलाकार: मनोज बाजपेयी, गजराज राव, के के मेनन, अली फजल, हर्षवर्धन कपूर, राधिका मदान, श्वेता बसु प्रसाद,
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
नई दिल्ली। 25 जून को नेटफ्लिक्स (Netflix) पर रिलीज हुई वेब सीरीज 'रे' दर्शकों को काफी पसंद आ रही है। 'रे' में चार अलग- अलग कहानियां देखने को मिलेंगी। इन कहानियों के नाम हैं- फॉर्गेट मी नॉट, बहरूपिया, हंगामा है क्यों बरपा और स्पॉटलाइट।
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फॉर्गेट मी नॉट
रे की पहली कहानी 'फॉर्गेट मी नॉट' का निर्देशन श्रीजीत मुखर्जी ने किया है। 'फॉर्गेट मी नॉट' में अली फजल और श्वेता बसु प्रसाद अहम किरदार निभा रहे हैं। कहानी में अली फजल, इप्सित की भूमिका में हैं, जिसकी मेमोरी कंप्यूटर से भी अच्छी कही जाती है। इप्सित कुछ भी नहीं भूलता है और उसकी पर्सनल व प्रोफेशनल लाइफ में सब कुछ एक दम परफेक्ट है। ऐसे में एक दिन उसकी मुलाकात एक लड़की से होती है, जो उसे कुछ ऐसा बताती है, जो इप्सित को याद नहीं है। अब इसके बाद इप्सित के साथ कई ऐसी छोटी- छोटी चीजें होती हैं, जिससे उसको ऐसा महसूस होने लगता है कि वो चीजें भूलने लगा है। लेकिन कहानी का ट्विस्ट आपको हैरान कर देगा, वहीं श्वेता बसु प्रसाद के किरदार का नया रूप भी आपको पसंद आएगा। ये कहानी दर्शकों को जरूर ये सोचने पर मजबूर करेगी कि क्या हम भी वक्त के साथ बदले हैं?
बहरूपिया
रे की दूसरी कहानी 'बहरूपिया' का निर्देशन भी श्रीजीत मुखर्जी ने किया है। सीरीज में के के मेनन एक मेकअप आर्टिस्ट इंद्राशीष का किरदार निभा रहे हैं, जिसका दिल एक एक्ट्रेस तोड़ देती है। वहीं इंद्राशीष की दादी की मौत भी उसे अंदर से झकझोर देती है। ऐसे में इंद्राशीष अपने मेकअप स्किल्स की मदद से पहले अपने बॉस से बदला लेता है, जो उससे काफी परेशान रहता था। धीरे- धीरे इंद्राशीष बहरूपिया बनकर अलग- अलग रूप धरता है, लेकिन एक बाबा को गलत साबित करने के चक्कर में एक रेपिस्ट का रूप धरना उसे भारी पड़ जाता है। इस कहानी का अंत भी काफी बेहतरीन है और कहीं न कहीं हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हमें हर इच्छा सोच समझकर मांगनी चाहिए।
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हंगामा है क्यों बरपा
जब एक ही फ्रेम में मनोज बाजपेयी और गजराज राव नजर आएं तो फिर मजा आना लाजमी है। रे की तीसरी कहानी 'हंगामा है क्यों बरपा' का निर्देशन अभिषेक चौबे ने किया है। कहानी में मनोज बाजपेयी, मुसाफिर अली का किरदार निभा रहे हैं, जिसकी मुलाकात ट्रेन के एक सफर के दौरान बेग (गजराज) से होती है, जो एक स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पूर्व पहलवान है। सफर के दौरान मुसाफिर अली को याद आता है कि करीब दस साल पहले भी उसने बेग के साथ सफर किया था और तब उसकी एक घड़ी चोरी की थी। इस घड़ी की चोरी के बाद बेग का बुरा वक्त शुरू हो गया था और मुसाफिर अली के अच्छे दिन। लेकिन कहानी के अंत में कुछ ऐसा होता है, जिससे मुसाफिर अली और बेग दोनों की जूझ रहे होते हैं। इस कहानी के वो कैमरा व एडिटिंग शॉट्स बेहद शानदार हैं, जहां ट्रेन को महफिलों के सीन्स से जोड़ा गया है।
स्पॉटलाइट
रे की चौथी व आखिरी कहानी 'स्पॉटलाइट' का निर्देशन वासन बाला ने किया है। कहानी की शुरुआत में दिखाया गया है कि अभिनेता विक (हर्षवर्धन कपूर) को उनके हर बार सेम लुक की वजह से क्रिटिक्स पसंद नहीं करते हैं, लेकिन फैन्स के दिलों पर वो राज करते हैं। विक की जिंदगी में सब अच्छा होता है, जब तक दिव्य दीदी (राधिका मदान) की एंट्री नहीं होती है। इसके बाद तो विक जो भी चाह रहा होता है वो दिव्य दीदी की वजह से पूरा नहीं हो पा रहा है। दिव्य दीदी से नफरत करने वाले विक की आखिरकार मुलाकात दिव्य दीदी की से होती है और कहानी में आता है बड़ा ट्विस्ट।
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